गेहूं के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

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परिचय (Introduction)

गेहूं एक प्रकार का आहार होता है जो भोजन के उपयोग काम में लिया जाता है तथा सारे खाने वाले पदार्थों में गेहूं का महत्वपूर्ण स्थान है। सभी प्रकार की अनाजों की अपेक्षा गेहूं में पौष्टिक तत्व अधिक होते हैं। इसकी उपयोगिता के कारण ही गेहूं अनाजों में यह राजा कहलाता है। अपने देश भारतवर्ष में गेहूं का उत्पादन सबसे ज्यादा होता है। गेहूं की अनेक किस्में होती हैं जैसे- कठोर गेहूं और नर्म गेहूं। रंगभेद की दृष्टि से गेहूं सफेद और लाल दो प्रकार की होते हैं। सफेद गेहूं की अपेक्षा लाल गेहूं अधिक पौष्टिक मानी जाती है। इसके अलावा बाजिया, जनागढ़ी, शरबती, सोनरा पूसा, बंदी, बंसी, पूनमिया, टुकड़ी, दाऊदखानी, कल्याण, सोना और सोनालिका आदि गेहूं की अनेक किस्में होते हैं।

गेहूं के आटे से रोटी, पावरोटी, ब्रेड, पूड़ी, केक, बिस्कुट आदि अनेक चीजें बनाई जाती हैं। इसका प्रयोग भोजन के रूप में किया जाता है। गेहूं में चर्बी का अंश कम होता है। अत: गेहूं के आटे की रोटी के साथ उचित मात्रा में घी या तेल का सेवन करना आवश्यक होता है इससे शरीर में ताकत की वृद्धि होती है। घी के साथ गेहूं का आहार सेवन करने से पेट में गैस बनना दूर होता है तथा कब्ज नहीं होती है।

गुण (Property)

स्वस्थ मनुष्य के लिए गेंहू की रोटी अच्छा भोजन है। यह शरीर में खून की मात्रा को बढ़ाता है, शरीर को मोटा और स्वस्थ बनाता है। गेहूं को दांत से चबाकर इसे गिल्टियों पर लेप करने से गिल्टियां जल्दी ही पक जाती है और इसके बाद वह फूटकर ठीक हो जाती है। इसके आटे की पुल्टिश (पोटली) घी और नीम के साथ पकाई जाए तो यह फोड़ों और घाव के लिए लाभकारी होता है। इसका तेल अपरस के लिए लाभदायक होता है। गेंहू का रस मानसिक व शारीरिक दुर्बलता, कब्ज, अपच, व अन्य पेट रोग, उच्च रक्तचाप, अनिद्रा, बवासीर आंख व कान के रोग, बालों का सफेद हो जाना, स्त्रियों की माहवारी सम्बंधित समस्याएं, दमा व श्वास के रोग, मधुमेह, मूत्राशय के रोग, पथरी, पीलिया व यकृत रोग, यौन रोग व कैंसर आदि रोगों में लाभदायक होता है।

हानिकारक प्रभाव (Harmful effects)

गेहूं का अधिक मात्रा में सेवन करना आंखों के लिए हानिकारक हो सकता है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

पेशाब के साथ वीर्य आना (मूत्राघात):

100 ग्राम गेहूं को रात के समय में पानी में भिगों दें तथा सुबह के समय इसे पीसकर इसी पानी में मिलाकर लस्सी बना लें तथा इसमें स्वाद के लिए चीनी मिला दें। इसके बाद इसका सेवन करें और इस प्रकार के 7 दिन तक उपचार करने से पेशाब के साथ वीर्य रुक जाता है।

चोट के दर्द:

  • गेहूं की राख, घी और गुड़ इन तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच सुबह-शाम दिन में 2 बार खाने से चोट का दर्द ठीक हो जाता है।
  • हड्डी टूटना, चोट, मोच लगने पर गुड़ में बनाया हुआ गेहूं के आटे का हलवा खाने से लाभ मिलता है।
  • 2 चम्मच गेहूं की राख में गु़ड़ और घी मिलाकर रोज़ सुबह-शाम चाटें।

दस्त तथा पेचिश:

सौंफ को पानी में पीसकर, पानी में मिलाकर छान लें तथा फिर इस पानी में गेहूं का आटा गूंथकर रोटी बना लें। इस रोटी को खाने से दस्त और पेचिश ठीक हो जाता है।

सूजन तथा दर्द:

  • गेहूं को पानी में उबालकर इसे छान लें फिर इस पानी से सूजन वाली जगह को धोएं इससे सूजन कम हो जाती है।
  • गेंहू की रोटी एक ओर सेंक लें तथा एक ओर कच्ची रहने दें फिर रोटी की कच्ची भाग की तरफ तिल का तेल लगाकर सूजन वाले भाग पर बांध दें। इससे सूजन तथा दर्द दूर हो जाएगा।

हड्डी टूटना (फ्रैक्चर):

  • गुड़ से बने गेहूं का हलुवा खाएं। इससे हड्डी के टूटने का दर्द, चोट और मोच में लाभ मिलता है तथा हडि्डयां जल्दी जुड़ती है।
  • 10 ग्राम गेहूं की राख 10 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से टूटी हुई हडि्डयों की अवस्था में लाभ मिलता है। यह प्रयोग कमर और जोड़ों के दर्द में भी लाभकारी है।

पागल कुत्ते के काटने पर पहचान:

गेहूं के आटे को पानी में गूंथकर उसकी कच्ची रोटी बनाकर कुत्ते के काटे स्थान पर रख लगा दें। थोड़ी देर बाद उसे छुड़ाकर किसी अन्य स्वस्थ कुत्ते के पास खाने के लिए डाल दें। यदि वह स्वस्थ कुत्ता उस आटे को नहीं खाए तो समझ लेना चाहिए कि किसी पागल कुत्ते ने काटा हैं। यदि खा ले तो समझना चाहिए कि जिस कुत्ते ने काटा है, वह पागल नहीं है।

पेशाब में जलन होना:

10 ग्राम गेहूं को 250 मिलीलीटर पानी में रात के समय में भिगोने के लिए रख दें। सुबह के समय में इस पानी को छानकर उस पानी में 25 ग्राम मिश्री को मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर होती है।

खुजली:

गेहूं के आटे में पानी मिलाकर इसका लेप बना लें फिर इस लेप को खुजली के स्थान पर तथा अन्य चर्म रोग पर लगाने से लाभ मिलता है।

खांसी:

20 ग्राम गेहूं, 10 ग्राम सेंधानमक को 250 मिलीलीटर पानी में घोलकर गर्म करें जब पानी तिहाई शेष रह जाए तो इसे छानकर पी लें। इस प्रकार से 7 दिनों तक उपचार करने से खांसी ठीक हो जाती है।

चर्मरोग (त्वचा की बीमारी):

विशेषकर- खर्रा, दुष्ट अकौता (छाजन) तथा दाद की तरह कठिन एवं गुप्त और सूखे रोगों में गेहूं को गर्म तवे पर खूब अच्छी तरह से गर्म कर लें और जब वह बिल्कुल राख की तरह हो जाए तो इसे खूब अच्छी तरह पीसकर सरसों के तेल में मिलाकर पीड़ित स्थान पर लगाएं इससे लाभ मिलेगा। कई वर्षों के असाध्य एवं पुराने चर्म रोग इससे ठीक हो जाते हैं।

कीड़े:

गेहूं के आटे में समान मात्रा में बोरिक एसिड पाउडर मिलाकर इसमें थोड़ा सा पानी डालकर गोलियां बना लें। इस गोली को गेहूं में रखने से गेहूं खराब करने वाले कीड़े और काकरोच खत्म हो जाते हैं।

मूत्राशय एवं गुर्दे की पथरी:

  • गेहूं और चने को पानी में उबालकर उसका पानी पीने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी गल जाती है। इसका प्रतिदिन सेवन करना चाहिए।
  • गेहूं के घास के रस को सेवन करने से मूत्राशय एवं गुर्दे सम्बंधी रोग दूर होते हैं, पथरी भी दूर हो जाती है। दांत मजबूत होते हैं तथा बालों को भी लाभ मिलता है।

प्रमेह (वीर्य विकार):

50 ग्राम गेहूं को आधा लीटर पानी में रात के समय भिगोंकर रखें फिर इसे पीसकर कपड़े से छान लें और इसमें 10 ग्राम चीनी मिलाकर और इस पानी को सुबह के समय सात दिनों तक पीने से लाभ मिलता है।

नकसीर:

यदि नाक से खून गिरता हो तो गेहूं के आटे में चीनी और दूध मिलाकर पीने से यह रोग दूर हो जाता है।

फोड़े:

गेहूं के आटे की पुल्टिश बनाकर फोड़ों पर बांधने से फोड़ें पक जाते हैं तथा इसके वे बाद फूटकर ठीक हो जाते हैं।

दमा या श्वास रोग:

  • गेहूं के पौधे का रस पीने से दमा और खांसी नष्ट हो जाती है।
  • अंकुरित बीज को पीसकर, उसमें पालक के पत्तों को पीसकर मिलाएं। इस मिश्रण को आटे में मिलाकर रोटी बनाएं। इस रोटी को खाने से दमा तथा श्वांस के रोग ठीक हो जाते हैं।

बालों के रोग:

  • गेहूं के पौधों के हरे पत्तों का रस निकालकर रोजाना सुबह कुछ दिन तक सिर में लगाने से बालों का झड़ना कम हो जाता हैं।
  • गेहूं के पौधों का रस 1 कप रोजाना 40 दिन तक पीने से बालों का झड़ना कम हो जाता हैं।

बाल तोड़:

बालतोड़ के शुरुआत में, 15-20 गेहूं के दाने दांत से चबाकर बालतोड़ पर दिन में 2-3 बार लगाने से वह ठीक हो जाता है।

बालों को काला करना:

गेहूं के पौधे का रस पीने से बाल कुछ दिनों में काले हो जाते हैं।

गैस्ट्रिक अल्सर:

गेहूं के छोटे पौधों का रस कुछ समय तक सेवन करने से गैस्ट्रिक अल्सर ठीक हो जाता है।