टिण्डा के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

508

परिचय (Introduction)

टिण्डा एक प्रकार की सब्जी होती है। टिण्डा में कैलोरी की कम मात्रा पाई जाती है तथा इसमें कम से कम 94 प्रतिशत जल तत्त्व पाया जाता है जिसमें विटामिन सी, सोडियम और क्लोराइड का एक अच्छा स्रोत होता है। टिण्डा की सब्जी बीमारी की स्थिति में खाना अधिक लाभदायक होता है।

प्रकृति (Nature)

टिण्डा की प्रकृति शीतल (ठण्डी) और तर होती है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

  1. बुखार (ज्वर) : हल्के ज्वर में टिण्डा की सब्जी का सेवन करने से ज्वर ठीक हो जाता है।

    2. उच्च रक्तचाप (हाईब्लड प्रेशर) : टिण्डा उच्च रक्तचाप को कम करता है व मूत्र (पेशाब) लाता है।

    3. शक्तिवर्धक (ताकत बढ़ाने के लिए) : टिण्डा सिर और शरीर को तुरंत शक्ति प्रदान करता है एवं शरीर को मोटा-ताजा और शक्तिशाली बनाता है।

    4. मूत्राशय की पथरी : टिण्डे को पीसकर 50 मिलीलीटर रस निकाल लें और इसमें 0.72 ग्राम जवाखार मिलाकर गुनगुना करके कुछ दिनों तक सेवन करने से पथरी गलकर निकल जाती है।