सौंठ के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

1970

परिचय (Introduction)

सौंठ हर घर में उपयोगी वस्तु है। अदरक पककर जब सूख जाती है तब उसकी सौंठ बनती है। साग-दाल के मसाले में इसका उपयोग होता है। सौंठ में अदरक के सारे गुण मौजूद होते हैं। आम का रस पेट में गैस न करें इसलिए उसमें सौंठ और घी डाला जाता है। सौंठ में उदरवातहर (वायुनाशक) गुण होने से यह विरेचन औषधियों के साथ मिलाई जाती है। सौंठ पाचनतंत्र के लिए उत्तम उपयोगी है। बुढ़ापे में अक्सर पाचनक्रिया धीमी पड़ जाती है, पेट में गैस पैदा होती है, कफ-प्रकोप रहता है। दिल में बेचैनी और हाथ-पैरों में दर्द होता है। ऐसी दशा में सौंठ का चूर्ण अथवा दुग्ध मिश्रित सौंठ का काढ़े का सेवन लाभदायक है। कफ और गैस के सारे रोगों और दिल के रोगियों के लिए सौंठ लाभदायक होती है। सौंठ से `सौभाग्य पाक´ बनाया जाता है और गर्भवती महिलाओं को कोई दोष न हो इस हेतु उसका विशेष रूप से सेवन कराया जाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह पाक बहुत ज्यादा गुणकारी और उत्तम औषधि है। सौंठ में अनेक गुण रहते हैं। इसलिए सौंठ को विश्व-भैषज और `महौषध´ नाम से जाना जाता है। सौंठ रुचिकारक, पाचक, तीखी, चिकनी, आमवातनाशक और गर्म है। यह पाक में मीठा, कफ, गैस तथा मलबन्ध को तोड़ने वाली है तथा वीर्यवर्धक और आवाज को अच्छा करने वाली है। यह वमन (उल्टी), सांस, दर्द, खांसी, हृदय रोग, (फीलपांव) श्लीपद, सूजन, बवासीर, अफारा व गैस को खत्म करती है। गर्म प्रकृति वालों को सौंठ अनुकुल नहीं रहती है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

जुकाम :
सौंठ (सूखी अदरक) और गुड़ को पानी में डालकर पकाने के लिए आग पर रख दें। पकने पर जब पानी चौथाई हिस्सा बाकी रह जाये तो इसे गर्म-गर्म ही छानकर 3 बार में पी जायें। इससे जुकाम में बहुत लाभ होता है।
10-10 ग्राम सोंठ, चिरायता, कटेरी की जड़, अडूसे की जड़ और 6 ग्राम छोटी पीपल को एक साथ मिलाकर 1 कप पानी में डालकर काढ़ा बना लें। पकने पर जब काढ़ा आधा बाकी रह जाये तो इसे उतारकर छानकर पीने से जुकाम ठीक हो जाता है।
सोंठ, पीपल और कालीमिर्च को बराबर की मात्रा में लेकर पीस लें। इसमें 1 चुटकी त्रिकुटा को शहद के साथ चाटने से जुकाम में आराम आता है। सोंठ को पानी में डालकर उबाल लें। फिर इसमें शक्कर मिलाकर पीने से जुकाम दूर हो जाता है।
सोंठ कालीमिर्च और पीपल को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। फिर इसमें 4 गुना गुड़ मिलाकर बेर के आकार की छोटी-छोटी गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली दिन में 3 बार लेने से जुकाम और सिर का भारीपन दूर हो जाता है।
सौंठ मिलाकर उबाला हुआ पानी पीने से पुराना जुकाम खत्म होता है। सौंठ के टुकड़े को रोजाना बदलते रहना चाहिए।

पीलिया :
गुड़ के साथ 10 ग्राम सोंठ खाने से पीलिया का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण गर्म दूध (क्रीम निकाला हुआ) या गुड़ के साथ सेवन करने से पीलिया रोग में बहुत लाभ होता है।

सर्दी-जुकाम :
सौंठ, तज और सड़ी चीनी का काढ़ा बनाकर पीने से सर्दी-जुकाम में लाभ होता है।

अम्लपित्त :

सोंठ, संचर नमक, भुनी हींग, अनारदाना और अमरबेल आदि को बराबर की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में से 2 चुटकी सुबह-शाम पानी के साथ पीने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) में लाभ होता है।
सोंठ, आंवले और मिश्री का बारीक चूर्ण बनाकर सेवन करने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) में लाभ होता है।

मूत्रकृच्छ :
सौंठ के काढ़े में हल्दी और गुड़ मिलाकर पीने से वीर्यस्राव रुकता है। पेशाब में जाने वाला वीर्य भी बंद हो जाता है।

मूत्राशय के रोग :
5 ग्राम सौंठ का चूर्ण बकरी या गाय के लगभग आधा किलो दूध के साथ सेवन करने से दर्द के साथ पेशाब में खून आना बंद हो जाता है।

सभी प्रकार के दर्द :
सौंठ, सज्जीखार और हींग का चूर्ण गर्म पानी के साथ सेवन करने से सारे तरह के दर्द नष्ट हो जाते हैं।

बवासीर :
सौंठ का चूर्ण छाछ में मिलाकर खाने से बवासीर (मस्से) में लाभ होता है।
सोंठ के साथ इन्द्रजव को मिलाकर पानी या दूध के साथ काढ़ा बनायें और इस में शहद मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीयें। इससे खूनी बवासीर ठीक होती है।
सौंठ और गुड़ बराबर मात्रा में लेकर रोजाना सुबह-शाम खाने से बवासीर ठीक हो जाती है।

कमजोरी :
सौंठ का काढ़ा बनाकर सेवन करने से शरीर की चमक बढ़ती है, मन प्रसन्न रहता है और शरीर मजबूत होता है।

पेचिश :
रोजाना गर्म पानी के साथ सौंठ खाना अथवा सौंठ का काढ़ा बनाकर इसमें 10 मिलीलीटर एरण्ड का तेल डालकर सेवन करने से पेचिश के रोग में लाभ होता है।

हैजा रोग :
सौंठ और बेलफल के गूदे का काढ़ा बनाकर सेवन करने से हैजा रोग में होने वाले पेट दर्द, दस्त और उल्टी में लाभ होता है।

सिर का दर्द :
सौंठ के चूर्ण में 4 गुना दूध मिलाकर सूंघने से किसी भी प्रकार का सिर दर्द दूर हो जाता है।
गर्म पानी में सौंठ को पीसकर कनपटी या ललाट या माथे पर लेप करने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
सौंठ, हर्र, नीम की छाल, आंवला, बहेड़ा और कच्ची हल्दी के रस को बराबर मात्रा में लेकर इसको 8 गुना पानी में एक भाग शेष रहने तक उबालें और इस एक भाग में गुड़ मिलाकर रोज़ाना सुबह-शाम को पीने से कितना भी पुराना सिर का दर्द क्यों न हो खत्म हो जाता है।
थोड़ी मात्रा में सौंठ और 2 लौंग को पीसकर सिर पर लगाने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
सौंठ को पानी में पीसकर माथे पर लगाने से जुकाम के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर हो जाता है।
सौंठ, किरमाला, पीपल, मिर्च की जड़ तथा सहजना के बीजों को गाय के मूत्र के साथ पीसकर सूंघने से कीड़ों के कारण होने वाला सिर का दर्द दूर हो जाता है।
सौंठ को पानी या दूध में घिसकर नाक से सूंघने से और लेप करने से आधे सिर के दर्द में लाभ होता है।

टायफायड :
3 ग्राम सौंठ को बकरी के दूध में पीसकर सगर्भा (गर्भवती) स्त्री को सेवन कराने से टायफायड बुखार में लाभ होता है।

हिचकी :
सौंठ और गुड़ को गर्म पानी में मिलाकर नाक में उसकी कुछ बूंदे डालने से हिचकी आना बंद हो जाती है।

आंख का फड़कना :
महारास्नादि क्वाथ (काढ़ा) में सोंठ मिलाकर सुबह-शाम पीने से शरीर के किसी अंग की हिलते रहने की शिकायत, फड़कना आदि ठीक होता है। चाहे अंगुलियों की कम्पन हो या पलकों का फड़कना।

कफ-पित्त ज्वर :
सोंठ, गिलोय, छोटी पीपल और जटामासी को पीसकर बनें काढ़े को पीने से कफ-ज्वर में लाभ होता हैं।

पेट की गैस बनना :
10 ग्राम सोंठ, 10 ग्राम कालीमिर्च, 10 ग्राम सेंधानमक, 10 ग्राम जीरा और सादा जीरा को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें। इसमें 5 ग्राम शुद्ध हींग को घी में भूनकर मिला लें। इस चूर्ण को भोजन के बाद 1 चम्मच की मात्रा में पीने से पेट की गैस में लाभ होता हैं।

गर्भपात :
3 ग्राम सोंठ तथा 15 ग्राम लहसुन को पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। इस काढे़ को 3 दिनों तक सेवन करने से गर्भ गिर जाता है।

हकलाना, तुतलाना :
50-50 ग्राम भुनी सौंठ, ब्राह्मी, गोरखमुण्डी और पीपल पीसकर रख लें। इस 10 ग्राम चूर्ण को शहद में मिलाकर रोजाना सुबह-शाम खायें। इससे जीभ का लगना बंद हो जाता है तथा तुतलापन ठीक हो जाता है।

पथरी :
4 ग्राम सोंठ, 4 ग्राम वरना, 4 ग्राम गेरू, 4 ग्राम पाषाण भेद तथा 4 ग्राम ब्राह्मी को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में आधी चुटकी जवाखार मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीने से पथरी गलकर निकल जाती है।