सिरस के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

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परिचय (Introduction)

सिरस का पेड़ पूरे भारत के जंगलों में पाया जाता है। इसके पेड़ पहाड़ी क्षेत्रों में 8 हजार फुट की उंचाई तक पाए जाते हैं। यह छायादार और अधिक पत्तों वाला पेड़ है। इसका पेड़ मध्यम आकार का होता है और इसकी टहनियां चारों ओर फैली हुई होती है। इसके तने भूरे रंग के खुरदरे व कटे-फटे होते हैं। इसके अंदर की छाल लाल, कड़ी व खुरदरी होती है और बीच में सफेद रंग की होती है। इसके पत्ते इमली के पत्तों के समाने लेकिन कुछ बड़े होते हैं। इसके फूल पीले व सफेद रंग के होते हैं जिससे सुगंध आती रहती है। इसके फल 4 से 12 इंच लम्बे, चपटे व पतले होते हैं जिसमें 6 से 22 बीज होते हैं। सिरस के पेड़ में बरसात के मौसम में फूल और सर्दी के मौसम में फल लगते हैं जो काफी समय तक पेड़ों पर लगे रहते हैं। इसके फल और फूल अलग प्रकार के होते हैं। इसके पेड़ तीन प्रकार के होते हैं- काला, लाल और सफेद।

गुण (Property)

सिरस वात, पित और कफ को कम करता है। यह दर्द को शांत करता है, फोड़े को ठीक करता है, विष के प्रभावों को दूर करता है और आंखों के रोग को नष्ट करता है। इससे लिंग का ढीलापन दूर होता है, खांसी नष्ट होती है, वीर्य बढ़ता है, कुष्ठ नष्ट होता है, प्रमेह ठीक होता है और पीलिया ठीक होता है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

खांसी :
पीले सिरस के पत्तों को घी में भूनकर दिन में 3 बार लेने से खांसी खत्म होती है।
50 ग्राम सिरस के बीजों को पानी में मिलाकर काढ़ा बना लें और यह काढ़ा प्रतिदिन सुबह-शाम सेवन करें। इससे खांसी में आराम मिलता है।

सिर का दर्द :
सिर का दर्द सुबह सूर्योदय के साथ शुरू होता है और सूर्यास्त के साथ ठीक होता है। ऐसे सिर दर्द में सिरस के ताजे 5 फूल गीले रूमाल में लपेटकर सूर्योदय से पहले सूंघना चाहिए। इससे सिर का दर्द ठीक होता है।
आधे सिर का दर्द जुकाम बिगड़ने से भी होता है। ऐसे में सिरस के बीज, छाल और फूलों को अलग-अलग पीसकर शीशी में भर लें। यह प्रतिदिन सूंघने से आधे सिर का दर्द ठीक होता है।
सिर दर्द में सिरस के फूलों को सूंघने से सिर का दर्द ठीक होता है।
सिर दर्द से पीड़ित रोगी को सिरस के बीजों और मूली के बीजों को पीसकर सूंघना चाहिए। इससे सिर का दर्द और आधासीसी (आधे सिर का दर्द) का दर्द ठीक होता है।

पीलिया :
सिरस की छाल को पीसकर 2 चम्मच की मात्रा में पानी में रात को भिगो दें और सुबह इसे छानकर खाली पेट पीएं। इससे पीलिया के रोग में लाभ मिलता है।

पेशाब का रुक जाना :
सिरस के फूल को पीसकर 2 चम्मच की मात्रा में 2 चम्मच मिश्री के साथ एक गिलास पानी में घोलकर पीने से पेशाब खुलकर आता है।

खूनी बवासीर :
सिरस के बीजों को बारीक पीसकर तेल में मिलाकर 4 दिन तक रखें। फिर इस तेल को गर्म करके छान लें और मस्सों पर प्रतिदिन लगाएं। इससे बवासीर के मस्से सूखकर गिर जाते हैं।
100 ग्राम सिरस के बीज और 50 ग्राम मिश्री को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 2 चम्मच प्रतिदिन 4 बार ठंडे पानी से फंकी लें। इससे बवासीर में खून का आना बंद होता है और बवासीर भी ठीक होता है।

बवासीर :
6 ग्राम सिरस के बीज और 3 ग्राम कलियारी की जड़ को पानी के साथ पीसकर बवासीर पर लेप करने से बवासीर ठीक होता है।
सिरस के बीज, कूठ, आक का दूध, पीपल और सेंधा नमक बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और इसका लेप बवासीर पर करें। इससे बवासीर के मस्से सूख जाते हैं।
मुर्गे की बीट, चौंटली, हल्दी और पीपल बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर बवासीर के मस्सों पर लेप करने से मस्से सूख जाते हैं।
कलियारी की जड़, दंती मूल और चीता बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और बवासीर पर लेप करें। इससे बवासीर ठीक होता है।

चेहरे की सुन्दरता के लिए :
प्रतिदिन सिरस के फूलों को पीसकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे में निखार आता है। इससे चेहरे के दाग, धब्बे, मुंहासे आदि खत्म होते हैं। इसका इस्तेमाल कम से कम 1 महीने तक करें।

दांत दर्द :
दांतों में सड़न व दर्द होने पर 100 ग्राम सिरस के बीज और 40 ग्राम कालीमिर्च को बारीक पीसकर प्रतिदिन मंजन करें। इससे दांतों का दर्द व सड़न दूर होता है।
सिरस की गोंद और कालीमिर्च को पीसकर मंजन करने से दांत का दर्द बंद हो जाता है।

वीर्य की कमजोरी :
सिरस की छाल और फूल बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और यह 1 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम गर्म दूध के साथ सेवन करें। इसके सेवन से वीर्य गाढ़ा होता है और कामशक्ति बढ़ती है।
सिरस के बीजों का चूर्ण 2 ग्राम लेकर इसमें दुगनी मात्रा में चीनी मिलाकर प्रतिदिन गर्म दूध के साथ सुबह-शाम लेने से वीर्य बढ़ता है।

खाज-खुजली, दाद :
सिरस की छाल को पानी में पीसकर दाद, खाज, खुजली पर प्रतिदिन सुबह-शाम लेप करने से खुजली व दाद ठीक होता है।
सिरस के फूलों को पीसकर किसी भी शर्बत में एक चम्मच मिलाकर पीने से खून साफ होता है और त्वचा के सभी रोग ठीक होते हैं।
सिरस के बीज को पीसकर चंदन की तरह लगाने से खाज-खुजली दूर होती है।

उल्टी :
सिरस के बीजों का 1 चम्मच चूर्ण 1 कप पानी में मिलाकर उबाल लें और इसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर हर आधे घंटे पर रोगी को पिलाएं। इससे उल्टी बंद होती है।

अंडकोष की सूजन :
सिरस की छाल को पीसकर लेप करने से अंडकोषों की सूजन समाप्त होती है।

मूर्च्छा (बेहोशी):
सिरस के बीज और कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर बकरी के पेशाब के साथ पीसकर आंख में काजल की तरह लगाएं। इससे सन्निपात बुखार में उत्पन्न बेहोशी दूर होती है।

कमजोरी :
1 से 3 ग्राम सिरस की छाल का चूर्ण घी के साथ मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है और शरीर का खून साफ होता है।

मिर्गी या पागलपन :
सिरस के बीज और करंज के बीजों को पीसकर सिर पर लेप करने से गर्मी के कारण उत्पन्न पागलपन दूर होता है। इससे मिर्गी के दौरे और आंखों के रोग भी लाभ मिलता है।

आग से जल जाने पर :
शरीर के जले हुए भाग पर सिरस के पत्तों को मलने से जलन शांत होती है।