मटर के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

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परिचय (Introduction)

मटर की सब्जी में प्याज डालने से वह स्वादिष्ट लगती है। मटर की सब्जी आलू डालकर बनाई जाती है। मटर की फली के हरे दाने खिचड़ी में भी डाले जाते हैं जिससे वह स्वादिष्ट बनती है। मटर मीठी (मधुर), रूखी और ठण्डी होती है।

गुण (Property)

मटर मल को बांधने वाली तथा वात, कफ और पित्त का नाश करने वाली है। मटर के पत्तों की सब्जी भेदक और पचने में हल्की है। इसके सेवन से स्त्रियों के स्तनों में दूध की वृद्धि हो़ती है। यह माहवारी की रुकावट दूर करती है। मटर खाने से खून और मांस बढ़कर शरीर पुष्ट होता है। यह प्रोटीन का उत्तम साधन है। 250 ग्राम मटर के कच्चे दाने खाने से प्रोटीन मिलता है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

कब्ज:

कच्ची मटर खाने से पेट की कब्ज दूर हो जाती है।

दाह (जलन):

शरीर में कहीं भी जलन हो तो हरी मटर पीसकर लेप करने से ठंडक मिलती है।

सौन्दर्यवर्धक (सुन्दरता को बढ़ाने वाला):

मटर उबालकर और पीसकर शरीर पर मलने से रंग गोरा होकर सौन्दर्य निखर उठता है।

उंगुलियों की सूजन:

सर्दी में उंगुलियों में सूजन हो तो मटर उबालकर उस पानी में 1 चम्मच तिल का तेल डालकर उंगुलियों की सिंकाई करें। बाद में इसी पानी से उंगुलियों को धोयें। इससे सूजन मिट जाती है।

स्तनों में दूध की वृद्धि:

मटर की फली खाने से स्त्रियों के स्तनों में दूध में वृद्धि होती है। मटर की कच्ची फलियां खानी चाहिए तथा मटर की सब्जी बनाकर खाना चाहिए।

मासिक-धर्म अवरोध:

मटर का अधिक मात्रा में सेवन मासिक-धर्म अवरोध (माहवारी रुकावट) को दूर करता है।

मोटापा बढ़ाना:

मटर खाने से शरीर में खून और मांस बढ़ता है।

एलर्जी:

मटर को पानी में उबालकर उसके दानों को निकालकर फेंक दें। फिर उस पानी में थोड़ा-सा नमक मिलाकर शरीर को साफ करने से एलर्जी के रोग में लाभ होता है।

शरीर में सूजन:

मटर को पानी में उबालकर इस पानी से शरीर को धोने से शरीर की सूजन दूर हो जाती है।