सहजन के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

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परिचय (Introduction)

सहजन के पेड़ अधिकतर हिमालय के तराई वाले जंगलों में ज्यादा पायें जाते हैं। सहजन के पेड़ छोटे या मध्यम आकार के होते हैं। इसकी छाल और लकड़ी कोमल होती है। सहजन के पेड़ की टहनी बहुत ही नाजुक होती है जो बहुत जल्दी टूट जाती है। इसके पत्ते 6-9 जोड़े में होते हैं। फलियां 6-18 इंच लम्बी 6 शिराओं से युक्त और धूसर होती हैं। सहजन के पेड़ तीन प्रकार के होते हैं जिन पर लाल, काले और सफेद फूल खिलते हैं। लाल रंग के फूल वाले पेड़ की सब्जी खाने में मीठी और सफेद रंग के फूल वाले पेड़ की सब्जी कटु होती है।

गुण (Property)

सहजन का प्रयोग दर्द निवारक दवा बनाने में किया जाता है। इसके फूल और फलियों की सब्जी बनाकर खाते हैं। सहजन की पत्तियों में विटामिन `ए` व `सी` कैरोटिन और एस्कॉर्बिक एसिड के रूप में बहुत मिलता है। इसकी 100 ग्राम पत्तियों में लगभग 7 ग्राम कैरोटिन होता है, जिसे हमारा शरीर विटामिन `ए` में बदल देता है, जो आंखों के रोगों के लिए जरूरी होता है। इसकी मुलायम हरी पत्तियों की सब्जी बनाकर सेवन कर सकते हैं। इसकी पत्तियों को दूसरी सब्जी के साथ मिलाकर भी पका सकते हैं। इसकी सब्जी खाने की ओर कम लोगों का ध्यान जाता है, लेकिन इसके गुण देखते हुए इसकी सब्जी अधिक खानी चाहिए।

यह चटपटा, गर्म, मीठा, हल्का, जलन को शांत करता है, भूख को बढ़ाता है, बलगम को नष्ट करता है, वातनाशक, वीर्यवर्धक, फोड़े-फुंसी को खत्म करता है, गण्डमाला, गुल्म, प्लीहा तथा विद्रधि नाशक है तथा दस्त अधिक लाता है, सहजन के बीज आंखों के लिए लाभकारी तथा सिरदर्द दूर करने वाला है।

इसकी शाखा की एक बहुत अच्छी खासियत है कि इसे जमीन में गाड़ दिया जाये तो इसका पेड़ उग जाता है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

बार-बार भूख लगना :
10 मिलीलीटर सहजन के पतों का रस, शहद में मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से बार-बार भूख लगने का रोग ठीक हो जाता है।
सहजन के पत्तों का रस शहद के साथ मिला कर रोजाना 2 बार पीने से लीवर और प्लीहा (तिल्ली) से पैदा हुए रोग जैसे बार-बार भूख का लगना आदि रोग दूर हो जाते हैं।

कब्ज :
सहजन के कोमल पतों का साग खाने से कब्ज दूर होकर शौच खुलकर आती है।

मुंह के छाले :
सहजन की छाल का काढ़ा बनाकर गरारे करने से मुंह के छाले, पीड़ा आदि खत्म होती है।

नपुंसकता :
सहजन के फूलों को दूध में उबाल कर रोजाना रात को मिश्री मिलाकर पीने से नपुंसकता दूर होती है।

दांतों में कीडे़ और दर्द :
दांतों में कीड़े लग जाने व तेज दर्द होने पर सहजन की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में 2 या 3 बार कुल्ला करने से दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं और दर्द में आराम रहता है।

कान का दर्द :
सरसों के तेल में सहजन की जड़ की छाल का रस डालकर थोड़ा सा गर्म करके बूंद-बूंद करके कान में डालने से कान का दर्द दूर हो जाता है।
सहजन के ताजे पत्तों का रस कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

कमजोरी :
सहजन की जड़ की छाल, संतरे के छिलके और जायफल की मद्यसारायी रस की 10-15 बूंद सुबह-शाम सेवन करने से स्नायु की कमजोरी मिट जाती है।

पक्षाघात :
संतरे की छाल, सहजन की जड़ की छाल तथा जायफल की मद्यसारीय रस की लगभग 10 से 15 बूंद रोजाना देने से पक्षाघात (लकवे) में बहुत लाभ मिलता है।

घाव में :
सहजने की थोड़ी-सी पत्तियों को पीसकर घाव पर लगाने से घाव ठीक हो जाता है।
घाव की सूजन पर सहजन की छाल पीसकर लेप करे और 5 ग्राम से 10 ग्राम छाल पीसकर सुबह शाम पीते रहने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है।

भगन्दर :
सहजने का काढ़ा बनाकर उस में हींग और सेंधा नमक डालकर पीने से भगन्दर के रोग मे लाभ होता है। सहजन के पेड़ की छाल का काढ़ा भी पीना भी भगन्दर रोग में लाभकारी होता है।

गुर्दे की पथरी :
सहजन की जड़ का काढ़ा बनाकर गुनगुना करके पीने से पथरी रोग ठीक होता है।
सहजने की सब्जी बनाकर खाने से गुर्दे व मूत्राशय की पथरी घुलकर पेशाब के साथ निकल जाती है।
सहजन तथा वरुण की छाल का काढ़ा बनाकर उस में लगभग आधा ग्राम यवक्षार को मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीने से पथरी जल्द घुलकर निकल जाती है।

यकृत का बढ़ना :
4 से 8 मिलीलीटर सहजन के नये पेड़ की जड़ की छाल के काढ़े में सुबह-शाम हींग और सेंधा नमक के साथ मिलाकर सेवन करने से यकृत (जिगर) का बढ़ना रुक जाता है।

अधिक नींद और ऊंघ आना :
सहजन के बीज, सेंधा नमक, सरसों और कूठ को 3-3 ग्राम की मात्रा में बारीक पीसकर इसका चूर्ण बना लें। अब इस चूर्ण को बकरी के मूत्र में घोंटकर रोगी को सूंघाने से नींद अधिक आने की बीमारी ठीक हो जाती है।

उच्च रक्तचाप :
15 ग्राम सहजन का रस सुबह और इतना ही रस शाम को पीने से उच्च रक्तचाप में बहुत लाभ होता है।

बेहोशी:
सहजन और त्रिकटु के बीजों को अगस्त की जड़ के रस में घोट कर सूंघने से बेहोशी दूर हो जाती है।
सहजन के बीजों के चूर्ण को नाक में डालने से बेहोशी खत्म हो जाती है।

चेहरे के लकवे में :
सहजन के जड़ की छाल, संतरे का छिलका और जायफल का मद्यसारीय रस (एल्कोहोलिक टिनचर) 10 से 15 बूंद पानी में मिलाकर रोजाना 2 से 3 बार पीने से चेहरे के लकवे मे लाभ होता है।

फोड़े-फुंसियों के लिए :
फोड़ा चाहे जैसा भी हो वह न पकता हो और ना ही फूटता हो तो सहजने की सब्जी खाने को दें और इसके पत्तों का रस और जड़ की छाल का लेप बनाकर फोड़े पर बांध दें। इसकों बांधने से फोड़ा बैठ जाता है।