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कपूर के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

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कपूर के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

परिचय (Introduction)

कपूर एक सदाबहार पेड़ है जो भारत के कई राज्यों में होते हैं और यह देहरादून के पर्वतीय क्षेत्रों में भी पाए जाते हैं। इसके पेड़ भारत के अलावा चीन, जापान व बोर्नियो आदि देशों में भी होते हैं। कपूर के पेड़ की ऊचाई 100 फुट और चौड़ाई 6 से 8 फुट तक हो सकती है। इसके तने की छाल ऊपर से खुरदरी व मटमैली होती है और अन्दर से चिकनी होती है। इसके पत्ते चिकने, एकान्तर, सुगंधित, हरे व हल्के पीले रंग के होते हैं। इसके पत्ते 2 से 4 इंच लंबे होते हैं। इसके फूल गुच्छों में छोटे-छोटे सफेद पहले रंग के होते हैं। इसके फल पकने पर काले रंग के हो जाते हैं। बीज छोटे होते हैं। पेड़ के सभी अंगों से कपूर की गंध आती रहती है। इसकी छाल को हल्का काटने से एक प्रकार का गोंद निकलता है जो सूखने के बाद कपूर कहलाता है।

हानिकारक प्रभाव (Harmful effects)

कपूर का सेवन अधिक मात्रा में करने से शरीर पर विषैला प्रभाव पड़ता है जिसके कारण पेट दर्द, उल्टी, प्रलाप, भ्रम, पक्षाघात (लकवा), पेशाब में रुकावट, अंगों का सुन्न होना, पागलपन, बेहोशी, आंखों से कम दिखाई देना, शरीर का नीला होना, चेहरे का सूज जाना, दस्त रोग, नपुंसकता, तन्द्रा, दुर्बलता, खून की कमी आदि लक्षण उत्पन्न होता है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

त्वचा के रोग:

कपूर को पीसकर नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर दिन में 2 से 3 बार नियमित रूप से कुछ दिनों तक लगाने से त्वचा के रोग दूर होते हैं।

सर्दी-जुकाम:

सर्दी-जुकाम से पीड़ित रोगी को रुमाल में कपूर का एक टुकड़ा लपेटकर बार-बार सूंघना चाहिए। इससे सर्दी-जुकाम में आराम मिलता है और बंद नाक खुलती है।

सिर दर्द:

  • यदि सिर दर्द हो तो कपूर और चंदन को तुलसी के रस में घिसकर लेप बनाकर सिर पर लगाए। इससे सिर का दर्द दूर होता है।
  • कपूर और नौसादर को एक शीशी के बोतल में भर दें और जब सिर दर्द हो तो इसे सूंघे। इससे सिर का दर्द दूर होता है।
  • सिर दर्द होने पर गुलरोगन का रस और कपूर का रस मिलाकर इसके 2 से 3 बूंद नाक में डालने से माईग्रेन (आधे सिर का दर्द) ठीक होता है।
  • कपूर का रस सिर पर लगाने या मलने से सिर का दर्द ठीक होता है।

नपुंसकता:

यदि किसी व्यक्ति में नपुंसकता आ गई हो तो उसे कपूर को घी में घिसकर लेप बनाना चाहिए और उससे लिंग की मालिश करनी चाहिए। इसका प्रयोग कुछ हफ्ते तक करते रहने से नपुंसकता दूर होती है।

आंखों के रोग:

आंखों के रोग से पीड़ित रोगी को भीमसेनी कपूर को दूध के साथ पीसकर उंगली से आंखों में लगाएं इससे बहुत सारे रोग में फायदा होता हैं।

स्तनों के दूध का बढ़ना:

यदि किसी स्त्री का दूध पीता बच्चा मर जाता है तो उसके मरने के बाद स्तनों में लगातार दूध बनता रहता है। ऐसे में स्तनों की दूध की अधिकता को दूर करने के लिए कपूर को पानी में घिसकर लेप बनाकर स्तनों पर दिन में 3 बार लगाएं। इससे स्तनों में दूध का अधिक बनना कम हो जाता है।

बिच्छू के डंक:

बिच्छू के डंक से पीड़ित रोगी को कपूर को सिरके में मिलाकर डंक वाले स्थान पर लगाना चाहिए। इससे बिच्छू का जहर नष्ट हो जाता है।

प्रसव का दर्द:

यदि प्रसव के समय तेज दर्द हो रहा हो तो स्त्री को पके केले में 125 मिलीग्राम कपूर मिलाकर खिलाना चाहिए। इससे के सेवन से बच्चे का जन्म आराम से हो जाता है।

आमवात (गठिया):

गठिया के दर्द से पीड़ित रोगी को तारपीन के तेल में कपूर मिलाकर रोगग्रस्त अंगों पर सुबह-शाम मालिश करना चाहिए। इससे आमवात (गठिया) का दर्द नष्ट होता है।

रक्तपित्त:

रक्तपित्त से पीड़ित रोगी को थोडा-सा कपूर पीसकर गुलाबजल में मिलाकर उसके रस को नाक में टपकाना चाहिए। इससे रक्तपित्त नष्ट होता है।

घाव:

यदि घाव जल्दी ठीक न हो रहा हो तो कपूर को उस पर लगाना चाहिए।

दमा:

  • 125 मिलीग्राम कपूर व 125 ग्राम हींग मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से श्वास (दमा, अस्थमा) रोग की शिकायतें दूर होती है। 10 ग्राम कपूर व 10 ग्राम भुनी हुई हींग लेकर पीस लें और इसमें अदरक का रस मिलाकर चने के बराबर गोलियां बना लें। इस गोलियों को छाया में सुखाकर 1-1 गोली दिन में 3-4 बाद पानी के साथ सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से दमा रोग में लाभ मिलता है।
  • कपूर को पानी में डालकर उबालें और उससे निकलने वाले भाप को सूंघे। इससे सांस सम्बन्धी परेशानी दूर होती है।
  • सांस रोग, चोट लगना व मोच आदि की शिकायत होने पर प्रतिदिन रात को थोड़ा सा कपूर मुंह में रखकर चूसना चाहिए। इससे सभी रोग दूर होता है।

खुजली:

10 ग्राम कपूर, 10 ग्राम सफेद कत्था और 5 ग्राम सिन्दूर को एक साथ कांच के बर्तन में डालकर मिला लें और फिर उसमें 100 ग्राम घी डालकर अच्छी तरह मसल लें। फिर इस मिश्रण को 121 बार पानी से धोएं। इस तरह तैयार मलहम को त्वचा की खुजली पर लगाने से खुजली दूर होती है। इसका प्रयोग सड़े-गले जख्मों पर भी करना लाभकारी होता है।

बच्चों के पेट में कीडे़ होना:

यदि बच्चे के पेट में कीड़े हो गए हों तो थोडा सा कपूर गुड़ में मिलाकर देने सेवन कीड़े मरकर बाहर निकल जाते हैं। इससे पेट दर्द में जल्दी लाभ मिलता है।

आंखों का फूलना:

बरगद के दूध में कपूर को पीसकर मिला लें और इसे 2 महीने तक फूली आंखों पर लगाए। इससे आंखों का फूलना ठीक होता है।

मूत्राघात (पेशाब में वीर्य आना):

  • मूत्राघात रोग से पीड़ित रोगी को कपूर के चूर्ण में कपड़े की बत्ती बनाकर लिंग पर रखना चाहिए। इससे मूत्राघात नष्ट होता है।
  • अगर पेशाब बंद हो गया हो तो लिंग के ऊपर कपूर का टुकड़ा रखना चाहिए। इससे पेशाब खुलकर आता है।
  • पेशाब बंद हो जाने पर कपूर को पानी में पीस लें और उसमें कपड़े को भिगोंकर उसकी बत्ती बनाकर लिंग पर रखें। इससे रोग ठीक होता है।

पलकों के बाल झड़ना:

कपूर को नींबू के रस में मिलाकर पलकों पर लगाने से पलकों के बाल झड़ना ठीक होता है।

पेट का दर्द:

4 या 5 कपूर के टुकड़े को चीनी के साथ मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द दूर होता है।

छाती का रोग:

कपूर को जलाकर उसके धुंए को नाक के द्वारा लेने से छाती का रोग दूर होता है।

गर्भाशय का दर्द:

कपूर को घी में मिलाकर नाभि के नीचे मलने से और इसके 3-4 टुकड़े चीनी के साथ खाने से गर्भाशय का दर्द ठीक होता है।

आंखों का दुखना:

कपूर का चूरा आंखों में अंजन की तरह लगाने से आंखों का दर्द दूर होता है। यदि किसी को नींद न आती हो तो उसे कपूर को आंख में लगाना चाहिए। इससे नींद आती है।

स्वप्नदोष:

130 मिलीग्राम कपूर को एक चम्मच चीनी के साथ पीसकर रोज रात को सोते समय फंकी लेने से स्वप्नदोष की शिकायते दूर होती है।

बदहजमी:

कपूर और हींग को बराबर मात्रा में लेकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें और इसकी 1-1 गोली दिन में 3 बार ठंडे पानी के साथ सेवन करें। इससे बदहजमी दूर होती है।

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