काली मिर्च के गुण और उससे होने वाले आयुर्वेदिक इलाज

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परिचय (Introduction)

काली मिर्च को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे- मिर्च, कृष्णा, कोल, कंकोल, कटुक, कालीमिर्च, गोल मिर्च आदि। कालीमिर्च का प्रयोग मसाले के रूप में किया जाता है। कालीमिर्च अधिकतर मालावार प्रांत और कोंकण में उगाई जाती हैं। कालीमिर्च की पहली फसल अगस्त-सितम्बर में और दूसरी मार्च-अप्रैल में उगाई जाती है। कालीमिर्च की बेल होती है। कालीमिर्च की बेल 20 से 25 फुट लंबी होती है। इसके पत्ते पान के पत्तों की तरह 3 से 7 इंच तक लंबे होते हैं। कालीमिर्च के फूल सफेद रंग के होते हैं। इसमें गर्मी के मौसम में फूल लगते हैं और बरसात के मौसम में फल बनने शुरू होते हैं। इसके फल गुच्छों में लगते हैं। कच्ची अवस्था में फलों के रंग हरे और पकने के बाद लाल होकर सूखते-सूखते काले रंग के हो जाते हैं। कालीमिर्च का प्रयोग अनेक प्रकार के रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है। कालीमिर्च कम दाहक होने के कारण लालमिर्च की अपेक्षा अधिक उपयोगी होती है।

गुण (Property)

कालीमिर्च तेज व हल्की, चरपरी होती है और रस स्वाद में कडुवा होता है। यह भोजन के प्रति रुचि पैदा करने वाली, स्वाद को बढ़ाने वाली, कफ (बलगम) को समाप्त करने वाली, अग्निदीपक (पाचनशक्ति को बढ़ाने वाली) तथा वातदोष (गैस) को नाश करने वाली होती है। यह कीड़ों को नष्ट करती है, दर्द और खांसी को दूर करती है। यह हृदय के लिए भी लाभकारी होती है।

विभिन्न रोगों में उपचार (Treatment of various diseases)

जुएं होना:

सीताफल के 10 से 12 बीज व 5 से 6 कालीमिर्च को मिलाकर पीस लें और इसे सरसों के तेल में मिलाकर लेप तैयार कर लें। यह लेप रात को सोने से पहले बालों के जड़ों में लगाएं और सुबह बालों को धोएं। इस तरह इसका प्रयोग कुछ दिनों तक करने से जुंए खत्म होती हैं।

सिर का दर्द:

  • 3-4 दाने कालीमिर्च, 3 ग्राम अदरक एवं 7-8 तुलसी के पत्ते को मिलाकर हल्का कूट लें और पानी में उबालकर चाय बनाकर पीएं। इसे चाय की तरह पीने से सर्दी के कारण होने वाला सिर दर्द ठीक होता है।
  • सिर दर्द होने पर कालीमिर्च और धनिये को पानी के साथ पीसकर माथे पर लगाने से सिर दर्द तुरंत दूर होता है।
  • कालीमिर्च, लौंग और तुलसी के पत्ते को पानी के साथ पीसकर लेप बनाकर माथे पर लगाने से सिर दर्द में जल्दी लाभ मिलता है।
  • कालीमिर्च के चूर्ण को भांगरे के रस के साथ पीसकर सूंघने से भी सिर दर्द समाप्त होता है।
  • सिर दर्द से पीड़ित रोगी को कालीमिर्च पीसकर सूंघना चाहिए या सिर पर लेप की तरह लगाना चाहिए। इससे सिर दर्द में आराम मिलता है।
  • नमक व कालीमिर्च को एक साथ पीसकर प्याज के रस में घोलकर लेप बना लें और इस लेप को सिर पर लगाएं। इस लेप को कपाल पर लगाने से दर्द जल्दी ठीक होता है।
  • 2 चुटकी पिसी हुई कालीमिर्च का चूर्ण और खाण्ड को मिलाकर खाने से आधे सिर का दर्द दूर होता है।
  • सिर दर्द से पीड़ित रोगी को कालीमिर्च, प्याज एवं नमक को एक साथ पीसकर लेप बनाकर सिर पर लगाना चाहिए। इससे दर्द में जल्दी आराम मिलता है। कालीमिर्च का बारीक पाउडर कपड़े में छानकर सूंघने से भी छींक आकर सिर दर्द दूर होता है।

आधासीसी (माइग्रेन, अधकपारी, आधे सिर का दर्द):

  • माईग्रेन से पीड़ित रोगी को 10 ग्राम कालीमिर्च चबा-चबाकर खाना चाहिए और ऊपर से 25 ग्राम देशी घी पीना चाहिए। इससे माईग्रेन में जल्दी आराम मिलता है।
  • कालीमिर्च एवं चूल्हे की जली हुई मिट्टी को एक साथ बारीक पीसकर सूंघने से आधे सिर का दर्द ठीक होता है।
  • माईग्रेन (आधासीसी का रोग) के रोग से पीड़ित रोगी को 10 कालीमिर्च एवं 10 ग्राम मिश्री के चूर्ण को पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। इससे आधे सिर का दर्द दूर होता है।
  • माईग्रेन से पीड़ित रोगी को 12 ग्राम कालीमिर्च को चबा-चबाकर खाए चाहिए और ऊपर से लगभग 30 ग्राम देशी घी को पीना चाहिए। इससे आधे सिर का दर्द ठीक होता है।

दिमाग की कमजोरी या स्मरण शक्ति का कम होना:

  • यदि दिमाग कमजोर होने के कारण कोई बात जल्दी समझ में न आती हो या दिमागी तौर पर अधिक परेशानी हो तो कालीमिर्च और मिश्री बराबर मात्रा में मिलाकर पीसकर प्रतिदिऩ एक कप दूध के साथ दिन में 3 बार सेवन करना चाहिए। इसके सेवन से दिमाग की कमजोरी दूर होकर दिमाग तेज होता है।
  • 8 कालीमिर्च को पीसकर लगभग 30 ग्राम मक्खन और चीनी के साथ मिलाकर चाटने से दिमाग की कमजोरी दूर होती है। इसके प्रयोग से स्मरण शक्ति बढ़ती है।

मानसिक उन्माद (पागलपन):

  • 12 कालीमिर्च और 3 ग्राम ब्राह्मी की पत्ती को पीसकर आधे गिलास पानी में मिलाकर छान लें और इसे प्रतिदिन 2 बार पीएं। इससे मानसिक पागलपन में बेहद लाभ होता है।
  • मानसिक पागलपन से पीड़ित रोगी को कालीमिर्च, सफेद सरसों, छोटी पीपल, हल्दी, दारूहल्दी, हींग, मंजीठ और सिरस के बीजों का प्रयोग करें। इन सभी औषधियों को बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को बकरी के पेशाब में पीसकर सुंघाने से और आंखों में लगाने से उन्माद व पागलपन दूर होता है।
  • कालीमिर्च, सौंठ, पीपल, भूनी हुई हींग, बच और सेंधानमक इन सभी को 5-5 ग्राम की मात्रा में लें और कूटकर चूर्ण बना लें। इस तैयार चूर्ण को गाय के पेशाब में पीसकर आंखों में लगाने से पागलपन या उन्माद ठीक होता है।
  • लगभग 1 ग्राम कालीमिर्च और 10 ग्राम छोटी चान्दड (चन्द्रभागा) को पीसकर आधे-आधे ग्राम की मात्रा में सुबह और रात को गुलाबजल के साथ रोगी को देने से तेज पागलपन दूर होता है।
  • कालीमिर्च के चूर्ण को घी में मिलाकर पीने से गैस के कारण उत्पन्न पागलपन में लाभ होता है।
  • यदि कोई रोगी पागलपन के रोग से पीड़ित हो तो उसके उपचार के लिए 25 ग्राम कालीमिर्च और 25 ग्राम धतूरे के बीज को मिलाकर कूट-पीस लेना चाहिए और पानी के साथ मिलाकर 120-120 मिलीग्राम की गोलियां बना लेना चाहिए। इनमें से 1-1 गोली मक्खन के साथ प्रतिदिन रोगी को सेवन कराने से पागलपन ठीक होता है।

कम दिखाई देना:

आंखों की रोशनी कम हो गई हो तो कालीमिर्च, घी व मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर 2-2 चम्मच प्रतिदिन सुबह-शाम खाए। इसके सेवन से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

रतौंधी (रात को दिखाई न देना):

  • कालीमिर्च को दही के साथ पीसकर बारीक पेस्ट की तरह बनाकर इस रोग से पीड़ित रोगी की आंखों पर लगाना चाहिए। इससे रतौंधी में लाभ मिलता है।
  • कालीमिर्च को शहद में घिसकर सुबह-शाम आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी की बीमारी दूर होती है।
  • कालीमिर्च, घी और चीनी को एक साथ मिलाकर सेवन करने से रतौंधी दूर होती है और आंखों के अन्य रोग में भी लाभ मिलता है।

गला बैठना या आवाज खराब होना:

  • यदि गला बैठ गया हो तो पिसी हुई कालीमिर्च और घी को मिलाकर भोजन करते समय पीएं। इसके सेवन से गला साफ होता है और अन्य रोग भी ठीक होते हैं।
  • कालीमिर्च 10 ग्राम, मुलेठी 10 ग्राम तथा 20 ग्राम मिश्री। इन सभी को पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण चुटकी भर की मात्रा में सुबह-शाम शहद के साथ मिलाकर खाएं। इसके सेवन से गला साफ होता है और आवाज सुरीली बनती है।

मुंह के छाले:

  • किशमिश और कालीमिर्च को मिलाकर चबाकर चूसने से मुंह के छाले दूर होते हैं। इसे 3-4 बार चूसने से ही मुंह के छाले ठीक होते हैं।
  • 15 ग्राम कालीमिर्च और 30 ग्राम किशमिश को मिलाकर चबाने से मुंह के छाले व जख्म ठीक होते है।

मसूढ़ों की सूजन:

कालीमिर्च का काढ़ा बनाकर गरारे करने से मसूढ़ों की सूजन दूर होती है।

त्वचा रोग:

  • कालीमिर्च के चूर्ण को घी में मिलाकर लेप करने से त्वचा रोग ठीक होता है। इस लेप का प्रयोग फोड़े-फुंसी, दाद, खाज, खुजली व एक्जिमा आदि में करने से भी लाभ होता है।
  • कालिमिर्च के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा के सूखे स्थान पर लगाना चाहिए। इससे त्वचा का रूखापन दूर होता है।

पेट में कीड़े:

4 से 6 कालीमिर्च के चूर्ण को एक गिलास मट्ठे के साथ रात को सोते समय पीने से पेट के कीड़े समाप्त होते हैं।

यकृत (लीवर, जिगर) रोग:

एक नींबू को बीच से काटकर दो टुकड़े कर लें और फिर इसके एक टुकड़े को बिना काटे 4 भाग में बांट लें। अब इसके एक भाग में कालीमिर्च का चूर्ण, दूसरे में सोंठ का चूर्ण, तीसरे व चौथे में मिश्री या चीनी डालकर रात को एक प्लेट में रखकर ढक दें। सुबह उठकर इसे तवे पर गर्म करके चूसने से कुछ में जिगर के रोग ठीक होते हैं। इसके प्रयोग से पाचनशक्ति मजबूत होती है और भूख भी बढ़ती है।

मुहांसे:

20 कालीमिर्च के दाने को गुलाबजल के साथ पीसकर रात को सोने से पहले चेहरे पर लगाएं और सुबह गर्म पानी से चेहरे को साफ कर लें। इससे चेहरे के कील, मुंहासे, झुर्रियां आदि साफ होकर चेहरा चमकने लगता है।

पित्ती उछलना:

पित्ती उछलने पर 10 कालीमिर्च को पिसकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को आधा चम्मच घी में मिलाकर पीएं और इससे शरीर की मालिश करें। इससे पित्ती उछलना ठीक होती है।

भूख का न लगना:

नींबू की शिकंजी में एक चुटकी भर कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से भूख खुलती है। इसका सेवन भोजन करने से आधे घंटे पहले करना चाहिए।

हिस्टीरिया:

हिस्टीरिया रोग से पीड़ित स्त्री को 1 ग्राम कालीमिर्च एवं 3 ग्राम मीठी बच को खट्टी दही में मिलाकर खाली पेट दिन में कम से कम 3 बार खाना चाहिए। इससे हिस्टीरिया रोग दूर होता है।

पलकों की फुंसी:

  • आंखों की पलकों पर दर्द वाली फुंसी होने पर कालीमिर्च को पानी में घिसकर लेप करना चाहिए। इससे पलकों की फुंसी पककर फूटकर ठीक हो जाती है।
  • उसका लेप बनाकर सूजन वाले स्थान पर लगाने से सूजन दूर होती है।

पुराना जुकाम:

कालीमिर्च 2 ग्राम को गुड़ और दही के साथ सेवन करें। इससे पीनस का रोग नष्ट हो जाता है।

गठिया (आमवात):

  • गठिया के रोगी को कालीमिर्च से प्राप्त तेल से मालिश करना चाहिए। इससे गठिया (आमवात) के रोग में लाभ मिलता है।
  • कालीमिर्च के तेल से गठिया या जोड़ों पर मालिश करने से दर्द में आराम मिलता है।

जी मिचलना:

यदि किसी रोगी का जी मिचला रहा हो तो उसे कालीमिर्च चबाना चाहिए। इससे मिचली के रोग में लाभ मिलता है।